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रघुवंशी समाज

नमामि रामं रघुवंश ऩाथम् ।।
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लेखक:- रामकुमार रघुवंशी, सिलवानी,जिला रायसेन मप्र.
रघुवंशी परिचय :-
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सूर्यवंशी क्षत्रिय है हम, रघुवंशी कुल नाम है।
अयोध्या आदि धाम हमारा, ईष्ट हमारे राम है ।।
सूर्यवंशी रघुकुल का शोर्य रथ चलता रहेगा ।
पीढ़ियों के रक्त में इनका सुयश पलता रहेगा ।।
रीति रघुकुल की जिसे, विरासत में हो मिली
आँधियों में वह दिया,जलता रहा जलता रहेगा ।।
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रघुकुल :-
रघुकुल भारतवर्ष के सभी क्षत्रीय कुलों में सर्वश्रेष्ठ क्षत्रियकुल माना जाता है। ऐतिहासिक दृष्टि से रघुकुल मर्यादा, सत्य, चरित्र, वचनपालन, त्याग, तप व शौर्य का प्रतीक रहा है। अयोध्या के सूर्यवंश (इक्ष्वाकुवंश) में रघु नामक परम प्रतापी राजा हुये थे। उन्ही सम्राट रघु का वंश रघुवंश या रघुकुल कहलाता है। रघुवंश एक मात्र ऐसा क्षत्रिय वंश है जो सूर्यवंश, इक्ष्वाकुवंश व रघुवंश इन तीनो नामों से जाना जाता है।
रघुवंशी :-
सम्राट रघु के वंशज रघुवंशी कहलाते है। रघुवंशी अयोध्या (कौशलदेश) के सूर्यवंशी क्षत्रिय है। रघुवंशियों को इक्ष्वाकु, सूर्यवंशी तथा ठाकुर भी कहा जाता है। —————————————
म.प्र. के रघुवंशी :-
म.प्र. के रघुवंशी विशुद्ध सूर्यवंशी क्षत्रिय है। म.प्र. के रघुवंशी रघुकुल शिरोमणि प्रभु श्रीराम के बड़े पुत्र कुश के वंशज है। जिनका निकास दक्षिणकौशल (सरयू और गोमती नदियों के बीच के क्षेत्र) से हुआ है।
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रघुवंशी परिचय
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(1) वंश – रघुवंश
(2) वंशानुक्रम –
सूर्यवंश – इक्ष्वाकुवंश – ककुत्स्थवंश – रघुवंश
(3) जाति – क्षत्रिय (सूर्यवंशी क्षत्रिय)
(4) कुलनाम – रघुवंशी
(5) गोत्र – कश्यप
(6) प्रवर – 3 (कश्यप, अप्सार, नैध्रुव )
(7) देव – वक्रतुंड गणेश
(8) इष्टदेव – भगवान विष्णु / श्रीराम
(9) कुलदेवी – महाकाली (विजयासन माता )
(10) वेद – ऋग्वेद
(11) मंत्र – सूर्यगायत्री
(12) जनेउ – तीन परिमल
(अन्तःगत, महागत, अभयगत )
(13) तिलक – लालवर्ण सीधा
(14) त्यौहार – विजयादशमी
(15) तीर्थ – प्रयाग
(16) नदी – सरयू
(17) शस्त्र – तलवार (सोनेरी)
(18) नगाड़ा – रणभेरी
(19) पशु – घोड़ा (साबकरण )
(20) पक्षी – गरुण
(21) ध्वज – सिंघध्वज ( प्रारंभ में कोविदार ध्वज था)
(22) चिन्ह – सूर्य की रथवाली प्रतिमा/चित्र , सूर्य का चिन्ह
(23) वंश परम्परा – विजयादशमी पर शस्त्र पूजन , नवरात्रि में शक्ति आराधना व कुलदेवी पूजन
(24) धाम – अयोध्या
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रघुवंशी क्षत्रियो के निवास :-
१. मप्र में रघुवंशी गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, भोपाल, सिहोर, देवास, उज्जैन, धार, छिंदवाड़ा, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर, वैतुल, हरदा , होशंगाबाद व नरसिंह पुर आदि जिलों में रहते है ।
२. उप्र में रघुवंशी मुख्य रुप से जौनपुर व वाराणसी जिलों में रहते है । इसके अलावा सुलतानपुर, गाजीपुर, फतेहपुर, आज़मगढ़, बाराबंकी, इलाहाबाद आदि जिलों में भी रहते है ।
३. बिहार में रघुवंशी सीवान व सारण जिलों में रहते हैं ।
४. हिमाचल प्रदेश में रघुवंशी काँगड़ा, चंबा व सोलन जिलों में रहते है।
५ .उत्तराखण्ड में रघुवंशी पौड़ी-गढ़वाल जिले में रहते है।
६. महाराष्ट्र में रघुवंशी नंदूरवार व अमरावती जिलो में रहते है।
७. राजस्थान व गुजरात के कुछ स्थानों में भी रघुवंशी रहते है।
रघुवंशी मूलतः सूर्यवंशी क्षत्रिय है।जो सूर्यवंशी , इक्ष्वाकुवंशी , ककुत्स्थवंशी , रघुवंशी नाम से जाने जाते है। रघुवंशी राजपूत श्रेणी मे आते है।
निवास- रघुवंशी वैदिक काल (प्रारम्भ) से कौसल जनपद (अयोध्या व अयोध्या के आस पास के क्षेत्र) मे रहते आये है। वर्तमान मे मध्यप्रदेश के गुना शिवपुरी दतिया अशोक नगर विदिशा सागर रायसेन भोपाल सीहोर शाजापुर सुजालपुर इंदौर उज्जैन बैतुल धार होशंगाबाद नरसिंहपुर जबलपुर कटनी छिंदवाड़ा सतना उमरिया आदि जिलो मे रहते है।
उत्तरप्रदेश मे वाराणसी जौनपुर डोभी जिलो मे तथा बिहार के कुछ जिलो मे रहते है।
महाराष्ट्र मे नागपुर क्षेत्र, मुम्बई व मुम्बई के आसपास के जिलो मे , नंदूरवार जिले, नासिक व नासिक के आसपास ब कुछ मराठबाड़ा क्षेत्र मे रहते है।
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अन्य रघुवंशी
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1.जाट रघुवंशी – जाट रघुवंशी उत्तरप्रदेश मे आगरा से अछेनर तक मथुरा के पास लगभग 200 गाँव मे रहते है।ये अपना सरनेम रघुवंशी या जाट लिखते है।
2. -रैगर रघुवंशी – ये राजस्थान में रहते है। रघुवंशी रक्षक पत्रिका निकालते है। य अपना सरनेम रैगर, मौर्य आदि लिखते है।इन्हें राजस्थान मे दलित माना जाता है। ये म.प्र. के रघुवंशियो से अलग है।
3.-राघवी रघुवंशी-ये महाराष्ट्र मे रहते है।ये अपना सरनेम भजन कुरमुरे नकुरे पाटील महाजन आदि लिखते है।ये मप्र यूपी के रघुवंशियो से अलग माने जाते है।
4.लौहाना रघुवंशी -ये गुजरात मे रहते है।इनके लगभग 250 सरनेम है इनके सरनेम ठक्कर टंडन आदि है। ये उप्र, मप्र के रघुवंशियो से अलग है। इन्हे राजपूत नही माना है।
5.राजपूत रघुवंशी- प्रतिहार बडगुजर सिकरवार मुढ़ाड आदि राजपूत राघव रघुवंशी कहलाते है। ये राजस्थान गुजरात हरियाणा मे रहते है।उत्तराखण्ड मे भी राजपूत रघुवंशी है ये अपना सरनेम रावत धोनी पंत आदि लिखते है।
5.-राठौर रघुवंशी- मप्र के झाबुआ जिले मे रहते है। झाबुआ मे राठौर रघुवंशी राजवंश का गोपाल मंदिर बहुत प्रसिद्ध है।

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