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समाज के धार्मिक स्थल

लेखक-श्री रामकुमार रघुवंशी, सिलवानी

तीर्थ/धार्मिक स्थल किसी जाति विशेष के नही होते है वे समस्त हिन्दुओ के होते है सभी के लिये उनका महत्व एक जैसा होता है।परन्तु कुछ तीर्थ स्थानो से रघुवंशियो के पूर्वजो का विशेष संवंध रहा है।

(1) तीर्थराज प्रयाग – यह रघुवंशियो का तीर्थ है।प्रयाग त्रिवेणी (गंगा यमुना सरस्वती के संगम) पर स्थित है।अब इलाहाबाद के नाम से जाना जाता है।यहाँ भरद्वाज ऋषी का आश्रम था ।प्राचीन काल में प्रयाग घने वनो से आच्छादित (ढका) था।यहाँ तीर्थ यात्रियों के रुकने व भोजन की व्यवस्था नही थी ।तब यहाँ अयोध्या के पुरोहितो ने अपनी कुटिया वनायी । ये अयोध्या के इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रियो के तीर्थ पुरोहित थे। ये तीर्थपुरोहित तीर्थयात्रियो की रूकने व खाने की व्यवस्था करते थे ।आयोध्या के राजा व क्षत्रिय यहाँ आते थे व इन्हे दान देते थे। जिससे इनकी जीविका चलती थी ।त्रेतायुग में श्रीराम लंका विजय के बाद यहाँ आये थे व जिस तीर्थ पुरोहित को अपने रघुकुल का तीर्थ पुरोहित मानकर यहाँ पूजन करवायी थी

[उन तीर्थ पुरोहित के वंशज आज भी प्रयाग (इलाहाबाद ) मे रहते है । जो रघुवंशी क्षत्रियो के तीर्थ पुरोहित है।कालन्तर मे ये प्रयागवाल व अब पण्डा कहलाते है।

2- अयोध्या- अयोध्या भी रघुवंशियो का प्रमुख तीर्थ स्थान है ।अयोध्या हम सभी रघुवंशियो के पूर्वजो की जन्मभूमि है। हमारे आराध्य श्रीराम की मातृभूमि कर्मभूमि है। अयोध्या (वर्तमान फैजावाद) मे रघुवंशियो की कुलदेवी देवकाली का मंदिर है।अयोध्या मे रघुवंशियो के कुलदेवता कालभैरव का मंदिर है।सरयु हम रघुवंशियो की पवित्र नदी है।अयोध्या मोक्ष पुरी है।जब रघुवंशी अयोध्या जाकर कुलदेवी कुलदेवता के दर्शन करते है सरयू मे स्नान कर जल से पितृ तर्पण करते है ।तो हमारे प्रसन्न होते है।आशीष देते है।

(3) ओंमकारेश्वर- ओमकारेश्वर मप्र के खण्डवा जिले मे नर्मदाजी के किनारे स्थित है।इसकी स्थापना रघुवंशियो के पूर्वज अयोध्या के राजा मांधाता जी ने की थी ।यहाँ पर मांधाता जी ने शिवलिंग की स्थापना कर शिवजी की आराधना की थी।

(4) चित्रकूट

(5) रामेश्वरम

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